देहरादून, उत्तराखंड – व्यावसायिक संगठनों, युवाओं के नेतृत्व और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम गढ़ने वाले पंकज मैसन आज युवाओं और व्यापारियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। अखिल भारतीय स्वर्णकार संघ 3545 के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने न केवल संगठन को नई दिशा दी है, बल्कि समाजसेवा की मुख्यधारा में युवाओं को जोड़ने का कार्य भी किया है।

नेतृत्व की नयी परिभाषा
मैसन का मानना है कि नेतृत्व केवल पद या प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं है। सही नेतृत्व वही है जो समाज की ज़रूरतों को सुनता है, व्यापार को टिकाऊ बनाता है और सेवा को प्राथमिकता देता है। उन्होंने व्यापारी समाज की समस्याओं को नज़दीक से समझकर उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास किए हैं।
उनकी पहल से समाज में संवाद और समरसता का वातावरण तैयार हुआ है। मैसन कहते हैं – “जहाँ संवाद होता है, वहीं समाधान जन्म लेता है और यही मेरी कार्यशैली की नींव है।”
संगठन से समाज सेवा तक
पंकज मैसन ने युवाओं को संगठित करने के साथ-साथ उन्हें समाज निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित किया है। उनके अनुसार हर युवा को समाज-निर्माता की भूमिका में उतरना चाहिए।
स्वर्णकार संघ में उनके नेतृत्व में आईटी आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे संगठन अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुआ है। वहीं, सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी से संगठन ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
संतुलित सोच और समावेशी दृष्टिकोण
मैसन की सबसे बड़ी ताक़त उनकी संतुलित और समावेशी सोच है। वे युवाओं को केवल संगठनात्मक कार्यों में नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय देखते हैं। उनके अनुसार, “संगठन के साथ-साथ समाज ही भविष्य की पूँजी है।”
व्यापार और समाज का नया रिश्ता
डिजिटल युग में जहाँ व्यापार नई चुनौतियों से गुजर रहा है, मैसन ने युवाओं को तकनीक का सही इस्तेमाल सिखाया। उन्होंने कहा कि बदलते हालात में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का प्रयोग व्यापार और समाज दोनों को जोड़ने का अहम माध्यम है।
साथ ही, मैसन मानते हैं कि समाजसेवा और व्यापार एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि व्यापार में सेवा की भावना हो, तो वही व्यवसाय स्थायी और सफल बनता है।

पंकज मैसन ने यह साबित किया है कि नेतृत्व का असली उद्देश्य पद या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना है। उनकी त्रिवेणी – व्यवसाय, संगठन और समाज सेवा – आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी है।