देहरादून — नगर निगम देहरादून द्वारा हाल ही में प्रस्तावित व्यापार लाइसेंस शुल्क के विरोध में दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज मैसोन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम महापौर सौरभ थपरियाल और नगर आयुक्त नमामी बंसल को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय को अविलंब वापस लेने की मांग की।
अध्यक्ष पंकज मैसोन ने कहा, “यह शुल्क न केवल तानाशाहीपूर्ण है, बल्कि पहले से आर्थिक संकट झेल रहे छोटे और मध्यम वर्गीय व्यापारियों के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। भाजपा सरकार को व्यापारी हितैषी कहा जाता है, लेकिन अगर व्यापारी पर ही अत्याचार होगा तो वह समर्थन कैसे देगा? हम इस जबरन वसूली को कदापि स्वीकार नहीं करेंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निगम ने दोहरा व्यवहार जारी रखा तो व्यापारी सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे।
मुख्य संरक्षक अशोक वर्मा ने कहा कि सरकार व्यापारी वर्ग का उत्पीड़न नहीं चाहेगी, लेकिन नगर निगम द्वारा करारोपण का यह निर्णय गलत है और आवश्यक होने पर इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
महामंत्री पंकज डिढ़ान ने कहा कि “बाजार पहले ही मंदी, महंगाई और ऑनलाइन व्यापार से जूझ रहा है। ऐसे में नगर निगम का यह शुल्क व्यापारियों को आर्थिक रूप से कमजोर करेगा। इसे तुरंत वापस लिया जाए।”


मुख्य संरक्षक सुशील अग्रवाल ने याद दिलाया कि मेयर सुनील उनियाल गामा के कार्यकाल में भी ऐसा टैक्स लगाने की कोशिश हुई थी, लेकिन दून वैली व्यापार मंडल के विरोध के बाद इसे वापस लेना पड़ा था।
युवा महामंत्री दिव्य सेठी ने इसे अवैध वसूली करार देते हुए कहा कि यह कदम व्यापारियों को हतोत्साहित करेगा और अगर नगर निगम पीछे नहीं हटा तो संगठन सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन करेगा।

युवा अध्यक्ष मनन आनंद ने स्पष्ट किया कि मांगें अनसुनी की गईं तो बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
बैटरी एसोसिएशन अध्यक्ष संजीव कपूर ने और राज प्लाजा संयोजकों अशोक नारंग एवं अमरजीत सिंह ने भी इस शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि पूरा व्यापार वर्ग इस निर्णय के खिलाफ एकजुट है।
इस मौके पर संरक्षक विश्वनाथ कोहली, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेखर फुलारा, उपाध्यक्ष हरीश मित्तल, प्रवक्ता हरमीत जयसवाल, सचिव विनय नागपाल, उपाध्यक्ष भरत गुलाटी, विभिन्न बाजार संयोजक, युवा कार्यकारिणी और बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।
व्यापार मंडल ने साफ कहा है कि अगर नगर निगम ने यह शुल्क वापस नहीं लिया तो बाजार बंदी और विरोध प्रदर्शनों का ऐलान किया जाएगा।











