देहरादून, जिसे उत्तराखंड की राजधानी और शिक्षा नगरी कहा जाता है, आज जिस समस्या से जूझ रहा है, वह किसी छोटे इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की धड़कनों पर असर डाल रही है। सहारनपुर चौक से लाल पुल तक का यह मुख्य मार्ग, जो कभी व्यापार और आवागमन की lifeline माना जाता था, अब अपनी जर्जर हालत की वजह से खतरे की घंटी बन गया है। रोज़ाना सैकड़ों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन गड्ढों, धूल और टूटे-फूटे डामर के बीच से निकलना किसी जंग लड़ने जैसा हो गया है। नतीजा यह है कि व्यापारी परेशान हैं, ग्राहक दूरी बना रहे हैं और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

विस्तारित लेख
व्यापारियों की बैठक: गुस्सा और उम्मीद दोनों
दून वैली महानगर उद्योग व्यापार मंडल की पटेल नगर इकाई ने इस गंभीर समस्या को लेकर बैठक बुलाई। अध्यक्ष अमरदीप सिंह उर्फ़ बिंकू भैया के दफ्तर में हुई इस बैठक में कई व्यापारी मौजूद रहे। मीटिंग में दुकानदारों ने साफ कहा कि खराब सड़क उनके कारोबार पर सीधे असर डाल रही है।
- कोई बोला कि ग्राहक अब दुकान तक आने से हिचकिचा रहे हैं।
- किसी ने कहा कि धूल दुकानों के भीतर घुसकर माल खराब कर देती है।
- एक व्यापारी ने तो हाल की घटना सुनाई कि कैसे एक बाइक सवार गड्ढे में फिसल गया और बाल-बाल बचा।
व्यापारियों ने यह भी बताया कि उनकी शिकायतें नई नहीं हैं। लंबे समय से वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासन से सीधा संवाद
मीटिंग के दौरान युवा व्यापारी सिद्धार्थ गुप्ता ने सड़क की तस्वीरें और वीडियो महानगर अध्यक्ष पंकज मैसोंन तक भेजीं। पंकज मैसोंन ने फोन पर ही आश्वासन दिया कि अधिकारियों से तुरंत संपर्क किया जाएगा और काम शुरू करवाया जाएगा। उन्होंने कहा, “व्यापारियों की समस्या हमारी प्राथमिकता है और इसे जल्द से जल्द सुलझाया जाएगा।”
हालांकि व्यापारी इस आश्वासन को अधूरा मानते हैं। उनका कहना है कि जब तक काम शुरू नहीं होगा, तब तक भरोसा करना मुश्किल है। अमरदीप सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी, “अगर एक हफ्ते में सुधार शुरू नहीं हुआ तो हमें सड़क पर उतरना पड़ेगा।”
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और अधूरा सपना
देहरादून में कुछ महीने पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत घंटाघर से सहारनपुर चौक तक की सड़क को मॉडल रोड बनाने का काम शुरू हुआ। लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से डक्ट बिछाने और बिजली-पानी की लाइनों को व्यवस्थित करने की योजना बनी। लेकिन दुर्भाग्य से सहारनपुर चौक से लाल पुल तक का हिस्सा अब भी उपेक्षित है।
ब्रिज एंड रूफ कंपनी को सितंबर से काम शुरू करना था, लेकिन प्रोजेक्ट अब तक अधर में लटका है। वहीं, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर तेजी से काम हो रहा है और दिसंबर 2025 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। पर सवाल यह है कि क्या बड़े एक्सप्रेसवे शहर की अंदरूनी परेशानियों का हल बन सकते हैं?
समाधान की ओर कदम या केवल वादे?
व्यापारियों ने प्रशासन को सुझाव भी दिए।
- धूल से निपटने के लिए फिलहाल पानी का छिड़काव किया जाए।
- गड्ढों को भरने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम बनाई जाए।
- लंबी अवधि के लिए सड़क की पूरी मरम्मत की जाए और मेंटेनेंस सिस्टम विकसित किया जाए।
इन सुझावों से साफ है कि व्यापारी सिर्फ शिकायत नहीं कर रहे, बल्कि ठोस समाधान भी पेश कर रहे हैं।
निष्कर्ष
सहारनपुर चौक से लाल पुल तक की सड़क की बदहाली सिर्फ व्यापारियों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे देहरादून की समस्या है। यह रास्ता रेलवे स्टेशन, पटेल नगर और शहर के अन्य हिस्सों को जोड़ता है। अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में रहेगी।
देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर के लिए अब वक्त आ गया है कि आंतरिक सड़कों की मरम्मत और देखभाल को प्राथमिकता दी जाए। क्योंकि जब तक ये छोटी सड़कें सुधरेंगी नहीं, तब तक बड़े-बड़े प्रोजेक्ट भी अधूरे ही लगेंगे।